Sunday, 28 September 2025

माँ भगवती की आरती

आरती कीजै जगत जननी की, भली आरती कीजै।
दुष्ट दलन संकट हरिणी की, भली आरती कीजै।। आरती कीजै...

शीश मुकुट गल मुक्तन माला, रूप मनोहर नयन विशाला।
जग तारिणि भयहारिणि की, भली आरती कीजै।। आरती कीजै...

बड़े बड़े दानव संहारे, देव जनन के काज संवारे।
महिष्मर्दिनी भवतारिणि की, भली आरती कीजै।। आरती कीजै...

जप तप ज्ञान तपस्या रूपा, दश विद्या, नव दुर्गा अनूपा।
भव मोचीनी सुखदायिनी की, भली आरती कीजै।। आरती कीजै...

कंचन थाल कर्पूर की बाती, जग मग ज्योत जले सारी राती।
शैल सुता माँ श्री भगवती की, भली आरती कीजै।। आरती कीजै...

करुणा कर करुणामयि की, भली आरती कीजै।
लक्ष्मी सरस्वती काली की, भली आरती कीजै।। आरती कीजै...

आरती कीजै जगत जननी की, भली आरती कीजै।
दुष्ट दलन संकट हरिणी की, भली आरती कीजै।।

                      – अमित पाठक शाकद्वीपी