Thursday, 13 March 2025

प्रिया प्रसाद

मैं मार्गशीर्ष की ओश
मैं मार्गशीर्ष की ओश
तुम पौष की धूप प्रिय....
मैं लिखा लाई हूं इंतजार
तुम आओगे बस यही उम्मीद लिए
क्षण- क्षण हूं निहारती
पलकों पर आस लिए
मैं अगहन की हूं पुर्णिमा
तुम उत्तरायण के भोर प्रिय.....
प्रेम, अनंत और अनुराग लिए
मैं हूं लिखती समाप्ति 
हूं तुम बिन सदैव अपूर्ण प्रिय....
मैं मार्गशीर्ष की ठंड
तुम पौष की सुनहरी धूप प्रिय.....
लिखा लाई हूं इंतजार 
आओगे सिंदुरी तुम प्रभा लिए 
पल पल हूं मैं निहारती 
धरा पर बिखरी ओस प्रिय.....
संग तुम्हारे परिक्रमा और
मैं उष्ण मैं विलीन प्रिय....
तुम हो आरंभ.......
मैं रचती अन्त प्रिय.....
मैं मार्गशीर्ष की ओश
पर प्रेम हमारा अनंत प्रिय........

Priya Prasad ✍️

आवासीय विवरण 
आद्रा, पश्चिम बंगाल 

नम्रता प्रितेश भंडारी

'श्रद्धांजलि'
*******************
 लगे रहो मुन्ना भाई'
मैंने फिल्म कल देखी
सबकी हो गई छुट्टी...! जब..., 
गांधीजी ने डायलॉग अपनी फेंकी...

उसी रात सपने में...
मैंने गांधीजी को देखा..
पूछा उनसे कारण मैंने...
 सपने में आने का...

सचमुच खड़े थे सामने वह...!
जब मैंने नेत्र अपने खोलें...
'सपना नहीं..., हकीकत हूं मैं!'
 थोड़ा हंसकर वे बोले...

'लगे रहो मुन्ना भाई' 
फिल्म मैंने भी है देखी...! 
खयाल आया देखकर जो मन में...
वह बात अब तुमसे है केहने की...

 जानपर खेलकर हमने...
 आजादी थी तुम्हें दिलवाई...
 'त्याग और बलिदान' की बोलो...!
 क्या कीमत हमने पाई?...

'अहिंसा परमो धर्म '
 मंत्र था तुम्हें सिखाया...
खून की नदिया बहाकर तुमने...
'दहशतवाद' को क्यों अपनाया...?

'स्वराज्य ' को 'सूराज्य' बनाने का...
मेरा सपना अधूरा रह गया....
स्वतंत्रता का उजाला
वैरभाव के अंधेरे में बदल गया...

मरने से पहले मन में 
एक आस थी लगाई...
स्वतंत्र भारत में हर कोई....
सदा बना रहे भाई-भाई...!

थोड़ा आगे बढ़कर...
वह बोले...'बात जो तुमसे,
मैं... अब कहूं ...!
चाहता हूं...हर कोई समझ ले...!

'सृष्टि का अंतिम स्वरूप है प्रेम'! 
 इस बात को तुम सब मानो...
'शास्त्र से बढ़कर नहीं कोई शस्त्र'...
 इस बात को तुम सब जानों...

 हिंदू-मुस्लिम-सिख-इसाई...
 रहे इनमें भाईचारा...
 भारत है हम सब की माता...!
 माता का कैसा बटवारा...?

 मन से निकाल द्वेष को...
 राह पकड़ो इंसानियत की...
अपनाकर जिसे मिले शांति सबको... 
अपनाओ धरोहर मेरी विचारधारा की...


 मेरी यह प्रार्थना 
 तुम घर-घर तक पहुंचाना! 
 महक उठे जिसकी खुशबू से...
 यह धरा - गगन - आशियाना....

अंतरमन में करके उजाला...
दो प्यार एक दूजे को...
राह पकड़कर सदाचार की...
बढ़ाओ आपसी भाई- चारे को...

जब विचार फैले मानवता के...
एक से हजारों में.. 
यही होगी सच्ची 'श्रद्धांजलि' मुझे...
मेरे पुण्यतिथि समारोह में...

मेरे पुण्यतिथि समारोह में...
मेरे पुण्यतिथि समारोह में...'

© नम्रता प्रितेशजी भंडारी. 

 संपर्क सूत्र (दूरभाष्य सहित) : 
 सौ.नम्रता प्रितेशजी भंडारी. 
'मंगलमूर्ति' निवास ,
 वकील कॉलनी,
 गंगाखेड-431514.
 जिला.परभणी (महाराष्ट्र)
 फोन नंबर. 737878007




Tuesday, 11 March 2025

देवानन्द मिश्र

शब्द

शब्द ज्ञान है और विज्ञान
शब्द की महिमा बहुत महान
शब्द तिमिर और ज्योति प्रमाण
शब्द सहज और शब्द कृपाण
शब्द ही मरहम शब्द ही चोट
शब्द से जानें मन की खोंट
शब्द ब्रह्म है शब्द विवेक
शब्द शब्द मे भेद अनेक
शब्द प्रतिष्ठा शब्द सनेह
पर हिय में बनता निज गेह
शब्द व्यंग है शब्द प्रशंसा
शब्द मनोरथ और अभिलाषा
शब्द शत्रु है शब्द है मित्र
शब्द गंध और शब्द है इत्र
अतः
शब्द चयन में रखें ध्यान
तभी मिलेगा मान-सम्मान

@ देवानन्द मिश्र
ग्राम पोस्ट जलसैन 
भाया रुद्रपुर जिला मधुबनी बिहार पिन 847411