Thursday, 13 March 2025

प्रिया प्रसाद

मैं मार्गशीर्ष की ओश
मैं मार्गशीर्ष की ओश
तुम पौष की धूप प्रिय....
मैं लिखा लाई हूं इंतजार
तुम आओगे बस यही उम्मीद लिए
क्षण- क्षण हूं निहारती
पलकों पर आस लिए
मैं अगहन की हूं पुर्णिमा
तुम उत्तरायण के भोर प्रिय.....
प्रेम, अनंत और अनुराग लिए
मैं हूं लिखती समाप्ति 
हूं तुम बिन सदैव अपूर्ण प्रिय....
मैं मार्गशीर्ष की ठंड
तुम पौष की सुनहरी धूप प्रिय.....
लिखा लाई हूं इंतजार 
आओगे सिंदुरी तुम प्रभा लिए 
पल पल हूं मैं निहारती 
धरा पर बिखरी ओस प्रिय.....
संग तुम्हारे परिक्रमा और
मैं उष्ण मैं विलीन प्रिय....
तुम हो आरंभ.......
मैं रचती अन्त प्रिय.....
मैं मार्गशीर्ष की ओश
पर प्रेम हमारा अनंत प्रिय........

Priya Prasad ✍️

आवासीय विवरण 
आद्रा, पश्चिम बंगाल 

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