नाम -संजना विश्वकर्मा
पिता का नाम -स्व श्यामलाल विश्वकर्मा
माता का नाम -राधा देवी
निवास -नरेला शंकरी भोपाल मध्यप्रदेश
शिक्षा - बी एस सी गणित
पद - शिक्षक
कलम का कमाल है
आज जो शब्दों की बौछार बेमिसाल है,
ये एक कलम का कमाल है।
बूंदे स्याही की कुछ अधूरी सी,
कागज को रंग देती है।
जब चलती है,कलम कागज पर,
खामोशी से कुछ कहती है।
ये कलम की गति नहीं,
भावनाओं की दौड़ का सवाल है।
ये एक कलम का कमाल है।
भावनाओं का धुआं जब उठता है,
बिना उड़े अधूरा लगता है।
ये कलम मित्र बन जाती है,
और कागज अपना लगता है।
खुशियों के मोती बिखरते है,
जब कागज पर सुनहरे,
हर शब्द सोना बनकर उभरता है।
और नई कहानी लिखता है।
जीवन की इस ओत-प्रोत में,
मेरी भावनाओं का सागर विशाल है।
आज जो शब्दों की बौछार बेमिसाल है,
ये एक कलम का कमाल है।
© संजना विश्वकर्मा
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