Tuesday, 4 March 2025

भगवान दास शर्मा 'प्रशांत'

शत शत नमन करू मैं तुमको
निर्धन या धनवान सभी के,
नित्य पेट को भरने वाले। 
खेतों में दिन-रात खपाकर, 
कठिन परिश्रम करने वाले। 
खुद अभाव में जीते हैं पर, 
कभी नहीं उफ़ करने वाले..

शत-शत नमन करूं मैं तुमको,
शस्य धान्य उपजाने वाले......

सुख सुविधा से वंचित रहकर,
भी नित्य कर्म रत रहने वाले।
जून दोपहर चाहे पूस रात हो,
कभी ना विचलित रहने वाले।।
ईश्वर पर विश्वास अटल रख,
सदा भाग्य भरोसे रहने वाले..

शत शत नमन करूं मैं तुमको,
शस्य धान्य उपजाने वाले..... 

जीवनभर कठिन परिश्रम कर,
के खून पसीना बहाने वाले।
खेतोँ से एक-एक दाना चुंगते,
तुम अन्नदाता कहलाने वाले।
ईश्वर पर विश्वास अटल रख, 
सदा भाग्य भरोसे रहने वाले।। 

शत शत नमन करूं मैं तुमको,
शस्य धान्य उपजाने बाले.....

रीति रिवाजों औ तीज त्योहारों,
को मिलकर साथ मनाने वाले। 
सबसे आज अपेक्षित होकर,
भी सदा मुस्कान लूटाने वाले।।
देशभक्ति का पाठ पढ़ाकर,
स्वं सुत सीमां पर भेजने वाले। 

शत-शत नमन करूं मैं तुमको..
शस्य धान्य उपजाने वाले.......

जीवन पर्यंत कठिन श्रम करके,
खून पसीना बहाने वाले। 
सत्य औ स्वाभिमान की खातिर,
आन पर मर मिट जाने वाले।।
अर्थ की रीढ़,वन देश का कंधा,
निज देश की शान बढ़ाने वाले..

शत-शत नमन करूं मैं तुमको,
शस्य धान्य उपजाने वाले...

भगवान दास शर्मा 'प्रशांत' 
शिक्षक सह साहित्यकार 
इटावा उत्तर प्रदेश 
दूरभाष: 70177777 7083

No comments:

Post a Comment