Wednesday, 5 March 2025

हर्षिता मेहता

नारी
नहीं आयेंगे कृष्ण बचाने,
नहीं करेंगे शिव अब तांडव।
हो तुम्हारा चीर-हरण,
या हो तुम किसी के लिए सती।।

नहीं देगा कोई साथ तुम्हारा,
नहीं बनेगा कोई आवाज़ तुम्हारी।
क्यों तुम किसी की प्रतीक्षा करती हो?
क्या तुम खुद के लिए काफ़ी नहीं?

तुम एक अबला नारी नहीं,
सब पर अब तुम भारी हो।
अरे महिषासुर का वध किया 
तुम तो वैसी दुर्गा काली हो।।

गलत जो तुम्हारे साथ हुआ,
तो उसमें गलती तुम्हारी नहीं।
और कहे जो तुम्हें कोई कुछ भी यहां 
तुम क्यों खुद का साथ निभाती नहीं?

सीता हो तुम, राधा तुम ही,
अरे, तुम ही सरस्वती लक्ष्मी हो।
क्यों तुम खुद को शून्य समझती?
तुम ही कैलाश की रानी हो।।

© हर्षिता 


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