Tuesday, 18 March 2025

हेमलता साहूकार

हँसी
बच्चों की मनमोहक हँसी हमें मोहित कर जाती है,
बच्चों का रोना हमें उदास कर जाती है।
बच्चों पर ही हमने
अपना सारा प्यार बरसाया,
बच्चों को ही हमने
जीने का आधार बनाया,
बच्चों पर ही हमने
अपना सर्वस्व लुटाया।

जब बच्चें बड़े हो 
समझदार बन जाते हैं,
हमारी छोटी सी बात भी उन्हें 
परेशान कर जाती है,
सारी काम की बातें भी उन्हें
बेकार समझ आती है।
जिनके लिए हमने दुनिया से लड़ा,
वे ही हमसे लड़ने लगते हैं
जिनके लिए हमने घर बनाया,
वे ही घर उजाड़ने लगते हैं ।  
कलयुग में तो बस यही
रीति-रिवाज सी बन जाती है।
फिर भी.....

बच्चों की मनमोहक हँसी हमें मोहित कर जाती है,
बच्चों का रोना हमें उदास कर जाती है।

© हेमलता साहूकार
कुरुद (छ.ग.)

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