अहम ने पूछा, इक दिन किस्मत से,
है तेरी क्या विसात, इस दुनिया में?
किस्मत... मीठी मुस्कान लिए,
होंठों से अपने बोली,
गर मेरी है विसात जाननी,
जा इस जग का इक फेरा लगा।
थीं महलों की रानी, सीता माता,
पर किस्मत में उनको वनवास मिला।
बात करे गर राधा रानी की तो,
पाकर प्रेम कृष्ण का भी.....
किस्मत में उनको,
बिछुड़न का विरह मिला।
गुलाब जो फूलों में हैं,
सबको, सबसे ज्यादा भाता......
पर कमल तो किचड़ में भी खिलकर,
ईश के चरणों में पूजा जाता।
पानी की बूंद की भी, अपनी किस्मत होती,
जो मिले धरा से विलीन ये हो जाती,
गर गिर जाएं सीपी में.......
किस्मत से मोती है कहलाती।
© सरिता गुप्ता
रंगिया कामरूप (असम)
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