-:: मैं शिक्षक, राष्ट्र निर्माता हूँ ::-
रचयिता - कवि दीपसिंह भाटी,'दीप', डिंगल रसावल
संस्कृति का मैं संवाहक, गुरू गौरव से गुंजित हूँ।
सद्कर्मों से मैं सुशोभित, पुण्य पद से पूजित हूँ ।
कर्मयोगी कुंभकार मैं, पचकर कुंभ पकाता हूँ ।
मैं शिक्षक, राष्ट्र निर्माता हूँ ।।1।।
मैं अथाह उदधि का मांझी, जल गहरे तक जाता हूँ।
सप्त तलों से खोज सिपी, लाखों मोती लाता हूँ।
मां भारती के मुकुट में, जननायक रत्न जड़ाता हूँ ।
मैं शिक्षक, राष्ट्र निर्माता हूँ ।।2।।
तराशकर मैं अनघढ़ पत्थर, सुन्दर शिल्प सजाता हूँ।
प्रेम ज्ञान तप का प्रहार कर, देव स्थान दिलाता हूँ।
करती जिसकी दुनिया पूजा, ईश ओज उपजाता हूँ।
मैं शिक्षक, राष्ट्र निर्माता हूँ ।।3।।
मन मानस का राजहंस मैं,नीर क्षीर का ज्ञाता हूँ।
बुरे भले का भेद बताकर, सम्यक ज्ञान सिखाता हूँ।
चाणक्य हूँ चन्द्रगुप्त सम, सक्षम शिष्य बनाता हूँ।
मैं शिक्षक, राष्ट्र निर्माता हूँ ।।4।।
मांझकर मन की मलीनता, सौम्य भाव सिखलाता हूँ।
खोलकर अंदर के चक्षु, दिव्य रूप दिखलाता हूँ।
जीवन कुरूक्षेत्र के जंग में, गीता सार सुनाता हूँ।
मैं शिक्षक, राष्ट्र निर्माता हूँ ।।5।।
पीयूष स्रोत से कर प्रक्षालित, जीवन सरस बनाता हूँ।
मानवता की मंदाकिनी से, मन का मेल धुलाता हूँ।
निश्छल आनंद का मैं निर्झर, स्नेह सुधा छलकाता हूँ।
मैं शिक्षक, राष्ट्र निर्माता हूँ ।।6।।
शारद मां का मैं उपासक, वीणा की झनकार हूँ।
त्रिदेव की मुझमें ताकत, गांडीव की टंकार हूँ।
'दीप' समर्पित हिन्द देश पर, तन मन जान लुटाता हूँ
मैं शिक्षक, राष्ट्र निर्माता हूँ ।7।।
©रचयिता - दीपसिंह भाटी, व्याख्याता -सणाऊ,
(चोहटन) बाड़मेर
मो. 9413307889
email -bhatideep64@gmail.com
प्रमाणित किया जाता है कि उक्त रचना मेरी स्वयं की मौलिक कापीराइट कृति है।
पत्ता----
दीपसिंह भाटी 'दीप'
'श्री स्वांगियां सदन'
गोस्वामी सभा भवन के पास, वार्ड नंबर 43,
इंद्रा कॉलोनी बाड़मेर-344001
8005568186,9413307889
खाता संख्या-51050848995
एस बी आई कलेक्ट्रेट परिसर बाड़मेर
आई एफ सी -sbin31729
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