कृष्ण विरह
जब से गए पिया छोड़कर,
जल रही शीत जल धार से।
कम हो जलन कुछ कर सखी
जल न सकूं इंतज़ार में।
मोम सी बह रही हूं बहना,
कुछ किसी से न अब है कहना।
पड़ेगा प्रतिदिन ताप सहना
वियोग में सुकुमार के।
लागी प्रीत उपवन में सखी
पिया प्रेम से जब थे मिले,
उठे हूक हिय में अब सखी,
कूक कोयल की कर्कश लगे।
प्रेम पाती पढ़ न पाती
प्रेम पीड़ा बड़ा सताती
झरने झरे अँसुअन के झरझर
दिया छोड़ क्यों मुझे ओ प्रियवर!
तपकर बनी कुंदन सखी,
उपवन मुझे निर्जन लगे।
अब कटे हर क्षण मेरा ,
मन मनके में पिया नाम जपे।
श्रृंगार से प्रतिकार अब
करो प्राण का संचार अब
करूं तुमसे ये मनुहार अब
लौटो प्रिय मन मधुबन में
मन मंदिर में उनको बसा लिया
जोहती बाट, मन में,जला दिया।
दिन रात रटती नाम तेरा
प्रेम ने मुझे क्या बना दिया
अलि गुंजार अब निराधार है
बिन नीर यमुना धार है।
सुन री सखी तुझे है पता
बिन कृष्ण राधा निष्प्राण है
© दीपा विरमानी राठौर
निवास :–
बरेली उत्तर प्रदेश
शिक्षिका केन्द्रीय विद्यालय
वायु सेना स्थल बरेली।
पता 124-गायत्री नगर निकट
वायु सेना गेट
नैनीताल रोड इज्जत नगर बरेली उत्तर प्रदेश
बहुत बहुत धन्यवाद 🙏
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